सोनौली: होली के उल्लास पर भारी पड़ी गैस की किल्लत
सोनौली/महराजगंज:
रंगों का त्योहार 'होली' आपसी प्रेम और पकवानों के स्वाद का संगम होता है। लेकिन इस वर्ष भारत-नेपाल सीमा पर स्थित प्रमुख व्यापारिक केंद्र सोनौली और इसके आस-पास के ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति कुछ अलग ही नजर आ रही है। जहाँ घरों में गुझिया और पकवानों की महक होनी चाहिए थी, वहाँ लोग खाली सिलेंडर लिए गैस एजेंसियों के चक्कर काट रहे हैं।
त्योहार का जायका हुआ फीका
होली जैसे बड़े पर्व पर रसोई गैस (LPG) की भारी किल्लत ने आम जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि त्योहार से हफ़्तों पहले बुकिंग कराने के बावजूद सिलेंडर की आपूर्ति नहीं हो पा रही है।
- किचन में सन्नाटा: गैस न होने के कारण कई घरों में होली के पारंपरिक पकवान नहीं बन पा रहे हैं।
- कालाबाजारी का डर: किल्लत का फायदा उठाकर कुछ क्षेत्रों में ऊंचे दामों पर सिलेंडर बेचने की शिकायतें भी सामने आ रही हैं।
- लकड़ी और चूल्हे का सहारा: गैस की कमी के चलते लोग एक बार फिर पुराने दौर की तरह लकड़ी और कोयले के चूल्हे जलाने को मजबूर हैं, जिससे त्योहार की तैयारी में समय और मेहनत दोगुनी लग रही है।
प्रशासनिक सुस्ती और उपभोक्ताओं की परेशानी
सोनौली एक अंतरराष्ट्रीय सीमा क्षेत्र है, यहाँ आबादी के साथ-साथ पर्यटकों की आवाजाही भी अधिक रहती है। ऐसे में गैस की मांग बढ़ना स्वाभाविक है। उपभोक्ताओं का आरोप है कि एजेंसियों ने त्योहार के लिए पर्याप्त स्टॉक का प्रबंधन नहीं किया, जिसके कारण ऐन वक्त पर संकट खड़ा हो गया।
"होली पर मेहमानों का आना-जाना लगा रहता है, लेकिन बिना गैस के हम चाय तक के लिए तरस रहे हैं। पकवान बनाना तो दूर की बात है।"
— नगर-वासी



















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